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Astro Mantra कितनी रखें भवन की ऊँचाई... Astro Mantra

चारदीवारी- मकान में चारदीवारी का निर्माण करते समय हमेशा ध्यान रखें कि दक्षिण-पश्चिम दिशा की चारदीवारी उत्तर व पूर्व दिशा की अपेक्षा मोटी व ऊँची रखें। निर्माण कार्य चरणों में- यदि मकान में निर्माण कार्य चरणों में संपन्न कराने की योजना है, तो वास्तु शास्त्र के नियमों के अनुसार ही संपन्न कराएँ। वास्तु के अनुसार सर्वप्रथम पश्चिम या दक्षिण दिशा में निर्माण कार्य करवाएँ। मकान की ऊँचाई- वास्तु के अनुसार किसी मकान की ऊँचाई कितनी होनी चाहिए, इसका पूरा ध्यान रखा जाना चाहिए। ऊँचाई का हिसाब निकालने के लिए मकान की चौड़ाई के 16वें भाग में चार हाथ, 96 अंगुल जोड़कर जितना योग हो, उसके बराबर ऊँचाई होनी चाहिए। यदि बहुमंजिली मकान की योजना हो तो पहली ऊँचाई में से 12वाँ भाग कम करके दूसरी मंजिल की ऊँचाई रखें। यही क्रम तीसरी व क्रमशः चौथी मंजिल के लिए भी रखें। तीसरी मंजिल के लिए दूसरी मंजिल से 12वाँ मान कम करें। प्रत्येक मंजिल के लिए यह सामान्य क्रम ऊँचाई के लिए है। यदि इस क्रम से 4, 31/2 , 3 हाथ जोड़ दें, तो यह ऊँचाई उत्तम मध्यम, कनिष्ठ तीन प्रकार की होगी। यदि इस क्रम में भी ...

vastu tips on astro mantra दिशाओं में छुपी हैं प्रगति

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दिशाओं में छुपी हैं प्रगति - उड़ते बादल, बहती हवाएँ, मानव, पशु, पक्षी यहाँ तक कि ग्रह, उपग्रह, दरिया का पानी सभी को चलने के लिए एक रास्ते की जरूरत होती है। जिन रास्तों के सहारे मानव व जीव-जंतु अपनों से मिलने के लिए लक्ष्य व गनतव्य प्राप्त करने को अनवरत रूप से गुजरा करते हैं। इन रास्तों को वास्तु शास्त्र में दिशाओं की संज्ञा दी गई है। इन 10 दिशाओं में सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड का राज छिपा हुआ है जो एक शून्य में अपने आपको समाहित किए हुए है यानी सिर्फ शून्य जो एक है और शून्य भी। वास्तव में शून्य ही अपने आपमें सब कुछ समेटे हुए है। पृथ्वी, सूर्य, चंद्रादि ग्रह, उपग्रह सभी इस शून्य (10 दिशाओं) से उत्पन्न हुए। जलाशय में किसी टुकड़े को फेंकने पर जल तरंगे शून्य आकृति से गोलाकार में आकर किनारे में लुप्त हो जाती हैं। जिससे यह अनुमान लगता है कि अखिल विश्व व ब्रह्माण्ड शून्य (दिशा) में समाया है, शून्य को वास्तु में ब्रह्मस्थान कहा गया है जहाँ से दस दिशाएँ गुजरती हैं, इनका केन्द्र बिन्दु और परिधि भी शून्य है। चाहे वह कम्प्यूटर हो या गणितीय संसार इस एक शून्य (दिशाओं) के बिना सब ...

HANUMAN हनुमान चालीसा है चमत्कारिक CHALISHA KE PRABHAV

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हनुमान चालीसा है चमत्कारिक ऑफिस में कुछ ठीक नहीं चल रहा...  घर पर पति-पत्नी की नहीं बनती... विद्यार्थियों को परीक्षा का टेंशन है...  किसी को भूत-पिशाचों का भय सता रहा है... मानसिक शांति नहीं मिलती... स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं पीछा नहीं छोड़ती... ऐसी ह ... ी मानव जीवन से जुड़ी सभी समस्याओं का हल है रामभक्त श्री हनुमान के पास।  परंतु आज के दौर में जब हमारे समयाभाव है और इसी के चलते हम मंदिर नहीं जा पाते, विधि-विधान से पूजा-अर्चना नहीं कर पाते हैं। ऐसे में भगवान की कृपा कैसे प्राप्त हो? क्या किया जा जिससे कम समय में ही हमारे सारे दुख-कलेश, परेशानियां दूर हो जाए? अष्ट सिद्धि और नवनिधि के दाता श्री हनुमान जी... जिनके हृदय में साक्षात् श्रीराम और सीता विराजमान हैं... जिनकी भक्ति से भूत-पिशाच निकट नहीं आते... हमारे सारे कष्टों और दुखों को वे क्षणांश में ही हर लेते हैं। ऐसे भक्तवत्सल श्री हनुमान जी की स्मरण हम सभी को करना चाहिए। ये आपकी सभी समस्या का सबसे सरल और कारगर उपाय है. श्री हनुमानचालीसा का जाप। कुछ ही मिनिट की यह साधना आपकी सारी मनोवांछि...

वास्तु के अनुरूप सजाएँ कलाकृतियाँ

कलाकृतियाँ सिर्फ कला दीर्घाओं की ही शोभा नहीं बढ़ातीं बल्कि घर को इनसे एक अलग पहचान मिलती है। लोग इन्हें वास्तु के हिसाब से भी सजाते हैं। पेंटिंग आपके घर के इंटीरियर में चार चाँद तो लगाती ही है, लेकिन अगर आप सही पेंटिंग का चयन करें तो यह घर में खुशी और समृद्धि भी लाती है। वास्तुशास्त्री आनंद भारद्वाज मानते हैं कि इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। अगर पेंटिंग के चयन में सावधानी बरती जाए तो यह काफी लाभदायक सिद्ध होती है। कैसा हो कलर कोड : पेंटिंग में रंगों का एक अलग स्थान होता है। हरियाली से युक्त, सूर्य की चमकती रोशनी और साफ नीले आसमान वाली पेंटिंग लिविंग रूम के लिए अच्छी मानी जाती है। ऐसी कलात्मक चीजें दक्षिण-पूर्व दिशाओं के लिए बेहतर हैं। गौर करने वाली बात है कि पेंटिंग ऐसी हो, जो ऊर्जा प्रदायिनी तथा प्रसन्नता देने वाली हो। नीले रंग की पेंटिंग उत्तर दिशा की दीवार पर बेहतर मानी जाती है। हरे या उससे मिलते-जुलते रंग पूर्व दिशा की दीवार पर लगाने से घर में खुशहाली आती है। लाल या संतरी रंग दक्षिण दिशा में हो तो बेहतर रहता है। बच्चों के कमरे में पेंटिंग लगाते समय...

शत्रु नाशक प्रमाणिक प्रयोग####शत्रु नाशक प्रमाणिक प्रयोग

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शत्रु नाशक प्रमाणिक प्रयोग शत्रु-बाधा निवारक ‘दारूण-सप्तक’ जब हिरण्यकश्यप को भगवान् नृसिंह ने अपनी गोद में रखकर अपने खर-तर नखों से उसके उदर को सर्वथा विदीर्ण कर चीर दिया और प्रह्लाद का दुःख दूर हो गया । तदनन्तर श्री भगवान् नृसिंह का वह क्रोध शान्त न हुआ, तब भगवान् विष्णु के आग्रह पर भगवान् रुद्र ने श्री शरभेश्वर (पक्षिराज, पक्षीन्द्र, पंखेश्वर) का रुप धारण कर, अपनी लौह के समान कठिन त्रोटी (चोंच) से, नृसिंह देव के ब्रह्म-रन्ध्र को विदीर्ण कर दिया, जिससे वे पुनः शान्त हो गए । संक्षिप्त अनुष्ठान विधि- स्वस्तिवाचन करके गुरु एवं गणपति पूजन करें। संकल्प करके श्री भैरव की पूजा करें- दक्षिण दिशा में मुख रखें। काले कम्बल का आसन प्रयुक्त करें। दो दीप रखें-एक घृत का देवता के दाँये और दूसरा सरसों के तेल का अथवा करंज का देवता के बाँये रखें। आकाश भैरव शरभ का चित्र मिल जाए तो सर्वोत्तम है, अन्यथा एक रक्तवर्ण वस्त्र पर गेहूँ की ढेरी लगाएँ, उस पर जल से पूर्ण ताम्र कलश रखें। उसपर श्रीफल रखकर शरभ भैरव का आवाहन, ध्यान एवं षोडशोपचार पूजन करे। नैवेद्य लगाएं और जप पाठ शुरु करें। इस...

श्रीसुदर्शन-चक्र-विद्या असाध्य रोग – व्याधि निर्मूलन प्रयोग

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श्रीसुदर्शन-चक्र-विद्या 3. असाध्य रोग – व्याधि निर्मूलन प्रयोग ‘श्रीसुदर्शन-चक्र-माला-मन्त्र’ द्वारा छोटी-मोटी बीमारियाँ अल्प काल में ठीक हो जाती है। अभिचार-प्रयोग भी नष्ट हो जाते है, किन्तु यदि दीर्घ-कालीन असाध्य बीमारियाँ हो, तो गन्हें दूर करने के लिए ‘श्रीसुदर्शन-चक्र’ का प्रयोग करना चाहिए- पहले सिद्ध ‘श्रीसुदर्शन-चक्र’ का विधिवत् पूजन करे। फिर भगवान् श्रीकृष्ण, भगवान् विष्णु व भगवान् दत्तात्रेय की मन्त्र-सिद्धि हेतु प्रार्थना करे। तब ‘चक्र’ को दाहिने हाथ में धारण करे या ‘चक्र’ को दाहिने हाथ में लेकर या ‘चक्र’ के ऊपर अपनी दाई हथेली रखकर निम्न-लिखित ‘रोग-मुक्ति-मन्त्र’ का नित्य निश्चित संख्या में जप करे। कुल जप १ लाख करे। हवनादि भी दशांश के प्रमाण में करे, तो उत्तम होगा। रोग-मुक्ति-मन्त्रः “ॐ ऐं ह्रां ह्रीं ह्रुं ह्रुं फट् स्वाहा महा-रुद्राय नमः।” उपर्युक्त विधि से उक्त मन्त्र का जप करने से प्रतिष्ठित ‘श्रीसुदर्शन-चक्र’ में, रोग के निर्मूलन की शख्ति की वृद्धि होती है। इसके अनुभव साधक को जप-काल में भी हो सकते हैं। कुछ भी अनुभव हो, एक लाख जप करना ही है। रो...

ऋण-मोचन महा-गणपति-स्तोत्र

ऋण-मोचन महा-गणपति-स्तोत्र विनियोगः- ॐ अस्य श्रीऋण-मोचन महा-गणपति-स्तोत्र-मन्त्रस्य भगवान् शुक्राचार्य ऋषिः, ऋण-मोचन-गणपतिः देवता, मम-ऋण-मोचनार्थं जपे विनियोगः। ऋष्यादि-न्यासः- भगवान् शुक्राचार्य ऋषये नमः शिरसि, ऋण-मोचन-गणपति देवतायै नमः हृदि, मम-ऋण-मोचनार्थे जपे विनियोगाय नमः अञ्जलौ। ।।मूल-स्तोत्र।। ॐ स्मरामि देव-देवेश ! वक्र-तुणडं महा-बलम्। षडक्षरं कृपा-सिन्धु, नमामि ऋण-मुक्तये।।१ महा-गणपतिं देवं, महा-सत्त्वं महा-बलम्। महा-विघ्न-हरं सौम्यं, नमामि ऋण-मुक्तये।।२ एकाक्षरं एक-दन्तं, एक-ब्रह्म सनातनम्। एकमेवाद्वितीयं च, नमामि ऋण-मुक्तये।।३ शुक्लाम्बरं शुक्ल-वर्णं, शुक्ल-गन्धानुलेपनम्। सर्व-शुक्ल-मयं देवं, नमामि ऋण-मुक्तये।।४ रक्ताम्बरं रक्त-वर्णं, रक्त-गन्धानुलेपनम्। रक्त-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये।।५ कृष्णाम्बरं कृष्ण-वर्णं, कृष्ण-गन्धानुलेपनम्। कृष्ण-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये।।६ पीताम्बरं पीत-वर्णं, पीत-गन्धानुलेपनम्। पीत-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये।।७ नीलाम्बरं नील-वर्णं, नील-गन्धानुलेपनम्। नील-पुष्पै पूज्यमानं, नमामि ऋण-मुक्तये।।८ धूम्राम्बरं ...